।।महाभारत सार।। मातृपितृसहस्राणि पुत्रदारशतानि च। संसारेष्वनुभूतानि यान्ति यास्यन्ति चापरे।। मनुष्य इस संसारमें हजारों माता-पिताओं तथा सैकड़ों स्त्री…
Read more »वनवासके प्रसंगमें पंचवटी में सुखपूर्वक बैठे हुए श्रीराम से ज्ञानप्राप्ति की इच्छा से लक्ष्मण प्रश्न करते है— ए क बार प्रभु सुख आसीना। लछिमन वचन …
Read more »महाभारत युद्ध में महाराज युधिष्ठिर को अपने स्वजनों के वध से बड़ी चिन्ता हुई। व्यासादि महर्षियों एवं स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण ने भी उन्हें समझाने का…
Read more »वनवास के समय जब प्रभु श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण व पत्नी सीता के साथ ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में पहुंचते है। वाल्मीकि उन्हें देखकर बहुत आह्लादित ह…
Read more »बाह्य तीर्थों से तो हम सब परिचित है ही‚ जिनमें स्नान या सेवन से तन-मन की तात्कालिक शुद्धि होती है। परंतु आज ऐसे आंतरिक तीर्थों के बारे में जानें…
Read more »वनवास के समय जब निषादराज गुह श्रीराम एवं सीता को भूमि पर शयन करता हुआ देखते है तो महान् विषाद में डूब जाते है‚ तब उनके विषाद को दूर करने के लि…
Read more »यह प्रसंग उस समय का है‚ जब श्रीकृष्ण अपने अवतार के प्रयोजन को पूर्ण कर अपने परमधाम को पधार चुके थे और अर्जुन उनके परिवार को लेकर द्वारका से इंद…
Read more »कल्पभेद को समझने से पहले हम यह जान लेते है कि कल्प क्या होता है? सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग- चारों युगों को मिलाकर एक चतुर्युगी होती …
Read more »विद्वज्जन ओंकार को प्रणव की संज्ञा देते है , इसे वेदादि भी कहा जाता है। अब इसके शाब्दिक विवेचन पर जाएंगे- प्रकृति से उत्पन्न संसारर…
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