।।दुर्गा सप्तश्लोकी।। ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥1॥ वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियोंके भी चित्त को बलपूर…
Read more »पुष्पवाटिकामें जब श्रीराम एवं सीता एक दूसरेको प्रथम बार देखते है। तब दोनों पुरातन प्रीतिको चरितार्थ करते हुए एक दूसरेको चाहने लगते है। अपनी सखि…
Read more »यह प्रसंग उस समय का है जब वनवास करते हुए युधिष्ठिर महात्मा दुर्वासा को अपने शिष्यों के साथ अतिथि सत्कार के लिये आमंत्रित कर लेते है‚ दुर्वासा भी…
Read more »।। दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र।। सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी। आर्या दुर्गा जया चाद्या त्रिनेत्रा शूलधारिणी।। पिनाकधारिणी चित्रा चण्डघण्टा म…
Read more »शरशय्या पर पडे़ हुए पितामह भीष्म ने अपने अंतिम समय में भगवान् श्रीकृष्ण को अपने समक्ष देखकर अपना अहोभाग्य समझा और एकाग्रचित्त से उनकी इस प्रकार …
Read more »महाभारत युद्ध के उपरांत अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से जब भगवान् श्रीकृष्ण ने उत्तरा के गर्भ की रक्षा की और स्वयं हस्तिनापुर से प्रस्थान करने ल…
Read more »इस पुण्डरीकाक्षपार स्तोत्र द्वारा कश्मीर नरेश राजर्षि वसु ने तीर्थश्रेष्ठ पुष्कर में तपस्यापूर्वक भगवान् नारायण की आराधना की थी। नमस्ते पुण्डरी…
Read more »।।विष्णु शतनाम स्तोत्र।। वासुदेवं हृषीकेशं वामनं जलशायिनम्। जनार्दनं हरिं कृष्णं श्रीवक्षं गरुडध्वजम्।। वाराहं पुण्डरीकाक्षं नृसिंह नरकांतकम्। अव्यक…
Read more »जब महर्षि पिप्पलाद की पत्नी पद्मा ने धर्मराज को शाप दे दिया तब उसे भगवान् शिव की इच्छा जानते हुए धर्मराज ने यह लघु परंतु सारगर्भित स्तोत्र कहा था— …
Read more »जब महाभारत युद्ध के बाद महाराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हो चुका था और भगवान् श्रीकृष्ण हस्तिनापुर से द्वारका की ओर लौट रहे थे। मार्ग में जाते हुए…
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